शरीर के आधे भाग में लकवा लगने को क्या कहते हैं?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 17:25

पक्षाघात (स्ट्रोक)

पक्षाघात तब लगता है जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जिस तरह किसी व्यक्ति के हृदय में जब रक्त आपूर्ति का अभाव होता तो कहा जाता है कि उसे दिल का दौरा पड़ गया है उसी तरह जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को "मस्तिष्क का दौरा’’ पड़ गया है।

पक्षाघात में आमतौर पर शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। सिर्फ़ चेहरे, या एक बांह या एक पैर या शरीर और चेहरे की पूरी एक ओर लकवा मार सकता है या दुर्बलता आ सकती है।

स्थानिकारकतता (इस्कीमिक स्ट्रोक): मस्तिष्क में अपर्याप्त रक्त आपूर्ति की स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए आक्सीजन और पोषण के अभाव को स्थानिकारक्तता (इस्कीमिक स्ट्रोक) कहा जाता है। स्थानिकारक्तता की वजह से अंततः व्यत्तिक्रम आ जाता है, यानी मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती है; और अंततः क्षतिग्रस्त मस्तिष्क में तरल युक्त गुहिका (भग्न या इंफ़ैक्ट) उनकी जगह ले लेती है। जिस व्यक्ति के मस्तिष्क के बाएं गोलार्द्ध (हेमिस्फीयर) में पक्षघात लगता है उसके दाएं अंग मे लकवा मारता है या अर्धांग होता है और जिस व्यक्ति के मस्तिष्क के दाएं हेमिस्फीयर में आघात लगता है उसका बायां अंग अर्धांग का शिकार होता है।

जब मस्तिष्क में रक्तप्रवाह बाधित होता है तो मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं तुरंत मर जाती हैं और शेष कोशिकाओं के मरने का खतरा पैदा हो जाता है। समय पर दवाइयां देकर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बचाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पता लगा लिया है कि आघात के शुरू होने के तीन घंटे के भीतर खून के थक्कों को घोलने वाले एजेंट टिश्यू प्लाज़्मिनोजेन एक्टिवेटर (टी-पीए) देकर इन कोशिकाओं में रक्त आपूर्ति बहाल की जा सकती है। शुरुआती हमले के बाद शुरू होने वाली क्षति की लहर को रोकने वाली बहुत-सी न्यूरोप्रोटेक्टव दवाइयों पर परीक्षण चल रहे हैं।

मस्तिष्काघात को हमेशा से लाइलाज समझा जाता रहा है। इस नियतिवाद के साथ एक और धारणा जुड़ी थी कि मस्तिष्काघात सिर्फ़ उम्रदराज़ लोगों को ही होता है इसलिए चिंता का विषय नहीं है।

इन भ्रांतियों का ही नतीजा है कि मस्तिष्काघात के औसत मरीज बारह घंटे के इंतज़ार के बाद आपात चिकित्सा कक्ष में पहुंचते हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा सेवाओं के प्रदाता आपात चिकित्सकीय स्थिति मानकर पक्षाघात का इलाज करने के बजाय "सतकर्तापूर्ण प्रतीक्षा’’ का रवैया अख़्तियार करते हैं।

"मस्तिष्क का आघात’’ जैसे शब्द के इस्तेमाल के साथ पक्षाघात को एक निश्चयात्मक-विवरणात्मक नाम मिल गया है। पक्षाघात के शिकार व्यक्ति और चिकित्सकीय समुदाय दोनों की तरफ से आपात कार्रवाई मस्तिष्क के दौरे का उपयुक्त जवाब है। जनता का पक्षाघात को मस्तिष्क के दौरे के रूप में लेने और आपात चिकित्सा का सहारा लेने की शिक्षा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पक्षाघात के लक्षण दिखने शुरू होने के क्षण से आपात संपर्क के क्षण तक बीतने वाला हर पल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सीमित संभावना को कम करता जाता है।

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